अध्याय 100

वह लड़का काफ़ी लंबा था, नैन-नक्श भी नाज़ुक थे, लेकिन इस वक्त उसका चेहरा गुस्से से लाल हो रखा था। आँखों में क्रोध और अपमान की मिली-जुली चिंगारी थी, और वह मुझे घूरता चला जा रहा था।

“सोफ़िया!”

उसकी आवाज़ इतनी ऊँची थी कि आसपास से गुजरते छात्रों का ध्यान खिंच गया। सबकी निगाहें हमारी तरफ़ मुड़ गईं, और क...

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